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Saturday, November 14, 2009

कविता-संग्रह : अनमोल संचयन, संपादन- रश्मि प्रभा

इसका विमोचन 31 जनवरी 2010 को विश्व पुस्तक मेला में हिन्द-युग्म के कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि बालस्वरूप राही ने किया

भावनाओं की आँच से तपे, निखरे शब्दों ने मुझे हमेशा अपने पास बुलाया. मैंने उन शब्दों से कभी घरौंदा बनाया, कभी फूलों की क्यारी, कभी कागज़ की नाव, कभी कलकल करती नदी ........यही मेरा खेल, मेरा सुकून रहा.शब्दों की तिलस्मी दुनिया से गुजरना, उसमें से कुछ अनकहे को ढूंढ़ना और सुनना मेरी दिनचर्या का सशक्त पल बना.

जाने-अनजाने शब्दों के रिश्ते बनते गए, मीठे पानी के स्रोत की तरह मेरी प्यास बुझाते गए.....फिर अचानक, एक दिन यह ख्याल आया कि इन्हें संजो लूँ और शब्द प्रेमियों की हथेली भर दूँ, आँखें प्रोज्ज्वलित कर दूँ, भावनाओं के तार जोड़ दूँ ......

कविता में एक जादू होता है....क्यों होता है,किसी को नहीं पता ! पर होता है...लिखता कोई है,पर वही भावना जाने कितनों का सुकून बन जाती है . कोई लिख लेता है, कोई बस सोचता है - एक कवि की कलम कईयों की जुबान बन जाती है.....इन्हीं सुकून के हिस्सों को मैं एक जगह लेकर आई हूँ . अलग - अलग जज़्बात , अलग - अलग एहसास !

संचयन मेरा ख्वाब था, मेरा प्रयास बना.........पर इस संचयन में इसमें संचित हर कवियों का उस प्रयास की सफलता में बराबर का योगदान रहा. सूरत की प्रीती मेहता ने अपनी कलम के बोल तो शामिल किये ही , मुख्य आवरण में काव्य सदृश गंभीर रंग भरे हैं.
मुझे विश्वास है कि हमारा यह सम्मिलित प्रयास आपके एकांत का मित्र बनेगा.

सादर
रश्मि प्रभा
(संकलन व संपादन)

मुद्रित मूल्य- रु 200
हिन्द-युग्म के पाठकों के लिए- रु 160